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श्लोक 6.26.22  |
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
न्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥ २२ ॥ |
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| अनुवाद |
| जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नये वस्त्र धारण कर लेता है, उसी प्रकार आत्मा भी पुराने एवं बेकार शरीरों को त्यागकर नया भौतिक शरीर धारण कर लेती है। |
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| Just as a man discards old clothes and wears new ones, similarly the soul discards old and useless bodies and takes on a new physical body. |
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