श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.26.22 
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
न्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नये वस्त्र धारण कर लेता है, उसी प्रकार आत्मा भी पुराने एवं बेकार शरीरों को त्यागकर नया भौतिक शरीर धारण कर लेती है।
 
Just as a man discards old clothes and wears new ones, similarly the soul discards old and useless bodies and takes on a new physical body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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