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mahabharat 6.26.2: श्री भगवान बोले, "हे अर्जुन! तुम्हारे मन में यह बुरा विचार कैसे आया? जो मनुष्य जीवन का मूल्य जानता है, उसके लिए यह बिलकुल भी उचित नहीं है। इससे उच्च लोकों की प्राप्ति नहीं, अपितु अपयश ही प्राप्त होता है।"   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.26.2 
श्रीभगवानुवाच
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् ।
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यकीर्तिकरमर्जुन ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले, "हे अर्जुन! तुम्हारे मन में यह बुरा विचार कैसे आया? जो मनुष्य जीवन का मूल्य जानता है, उसके लिए यह बिलकुल भी उचित नहीं है। इससे उच्च लोकों की प्राप्ति नहीं, अपितु अपयश ही प्राप्त होता है।"
 
Sri Bhagavan said, "O Arjuna! How did this evil thought come into your mind? This is not at all suitable for a man who knows the value of life. This does not lead to higher worlds but to infamy."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)