श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 24: सैनिकोंके हर्ष और उत्साहके विषयमें धृतराष्ट्र और संजयका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.24.4 
संजय उवाच
उभयो: सेनयोस्तत्र योधा जहृषिरे तदा।
स्रज: समा: सुगन्धानामुभयत्र समुद्भव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - हे राजन! उस समय दोनों सेनाओं के योद्धा हर्ष से भर गए थे। दोनों ओर सुगन्धित द्रव्य और पुष्पमालाएँ प्रकट हो गई थीं।॥4॥
 
Sanjaya said - O King! The warriors of both the armies were filled with joy at that time. Fragrances and garlands of flowers had appeared on both sides. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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