धृतराष्ट्र उवाच
केषां प्रहृष्टास्तत्राग्रे योधा युध्यन्ति संजय।
उदग्रमनस: के वा के वा दीना विचेतस:॥ १॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! उस समय किस पक्ष के योद्धा अत्यन्त हर्ष से भरकर सबसे पहले युद्ध में उतरे? किसके हृदय उत्साह से भरे हुए थे और कौन दुर्बल तथा अचेत हो रहे थे?॥1॥
Dhritarashtra asked - Sanjay! At that time, the warriors of which side were filled with immense joy and went into battle first? Whose hearts were full of enthusiasm and who were becoming weak and unconscious?॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥