| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा » श्लोक 4-5 |
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| | | | श्लोक 6.23.4-5  | अर्जुन उवाच
नमस्ते सिद्धसेनानि आर्ये मन्दरवासिनि।
कुमारि कालि कापालि कपिले कृष्णपिङ्गले॥ ४॥
भद्रकालि नमस्तुभ्यं महाकालि नमोऽस्तु ते।
चण्डि चण्डे नमस्तुभ्यं तारिणि वरवर्णिनि॥ ५॥ | | | | | | अनुवाद | | अर्जुन बोले - मंदराचल पर निवास करने वाले सिद्धों के सेनापति आये हैं ! आपको बारंबार नमस्कार है । आप कुमारी, काली, कपाली, कपिला, कृष्णपिंगला, भद्रकाली और महाकाली आदि नामों से विख्यात हैं । मैं आपको बारंबार नमस्कार करता हूँ । दुष्टों पर भयंकर क्रोध करने के कारण आप चण्डी कहलाती हैं, भक्तों को संकट से बचाने के कारण आप तारिणी कहलाती हैं, आपके शरीर का दिव्य रंग अत्यंत सुंदर है; मैं आपको नमस्कार करता हूँ ॥4-5॥ | | | | Arjun said – The army leader of the Siddhas who reside on Mandarachal has come! Greetings to you again and again. You are famous by the names Kumari, Kali, Kapali, Kapila, Krishnapingala, Bhadrakali and Mahakali etc. I salute you again and again. You are called Chandi because of your fierce anger on the wicked, you are called Tarini because of saving the devotees from trouble, the divine complexion of your body is very beautiful; I salute you. 4-5॥ | | ✨ ai-generated | | |
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