श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.23.3 
संजय उवाच
एवमुक्तोऽर्जुन: संख्ये वासुदेवेन धीमता।
अवतीर्य रथात् पार्थ: स्तोत्रमाह कृताञ्जलि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - युद्धस्थल में परम बुद्धिमान भगवान वासुदेव से ऐसी आज्ञा पाकर कुन्तीकुमार अर्जुन रथ से उतरकर दुर्गादेवी की स्तुति करने लगे॥3॥
 
Sanjay says - On receiving such orders in the battlefield from the most intelligent Lord Vasudev, Kuntikumar Arjun got down from the chariot and started praising Durgadevi. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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