| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा » श्लोक 28 |
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| | | | श्लोक 6.23.28  | यत्र धर्मो द्युति: कान्तिर्यत्र ह्री: श्रीस्तथा मति:।
यतो धर्मस्तत: कृष्णो यत: कृष्णस्ततो जय:॥ २८॥ | | | | | | अनुवाद | | जहाँ कहीं भी न्यायपूर्ण आचरण, तेज और आभा है, जहाँ कहीं भी सुख, समृद्धि और बुद्धि है, और जहाँ कहीं भी धर्म है, वहाँ श्रीकृष्ण हैं और जहाँ कहीं भी श्रीकृष्ण हैं, वहाँ विजय है ॥28॥ | | | | Wherever there is just behaviour, brilliance and lustre, wherever there is happiness, prosperity and intelligence, and wherever Dharma exists, there is Sri Krishna and wherever there is Sri Krishna, there is victory. ॥28॥ | | | इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतापर्वणि दुर्गास्तोत्रे त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत श्रीमद्भगवद्गीतापर्वमें दुर्गास्तोत्रविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥
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