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mahabharat 6.23.15: आप जम्भिनी, मोहिनी, माया, ह्रीं, श्री, संध्या, प्रभावती, सावित्री और माता हैं॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 6.23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 23: अर्जुनके द्वारा दुर्गादेवीकी स्तुति, वरप्राप्ति और अर्जुनकृत दुर्गास्तवनके पाठकी महिमा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.23.15 
त्वं जम्भनी मोहिनी च माया ह्री: श्रीस्तथैव च।
संध्या प्रभावती चैव सावित्री जननी तथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आप जम्भिनी, मोहिनी, माया, ह्रीं, श्री, संध्या, प्रभावती, सावित्री और माता हैं॥ 15॥
 
You are Jambhini, Mohini, Maya, Hree, Shree, Sandhya, Prabhavati, Savitri and mother.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)