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mahabharat 6.21.16: उस समय जिन लोगों ने उनकी शरण ली और पूछा कि "कृष्ण! हम कैसे जीतेंगे?", वे स्वयं जीत गए। इस प्रकार श्रीकृष्ण की कृपा से ही इन्द्र आदि देवताओं ने तीनों लोकों का राज्य प्राप्त किया॥16॥   |   mahabharat अध्याय 6.21: कौरवसेनाको देखकर युधिष्ठिरका विषाद करना और ‘श्रीकृष्णकी कृपासे ही विजय होती है’ यह कहकर अर्जुनका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 21: कौरवसेनाको देखकर युधिष्ठिरका विषाद करना और ‘श्रीकृष्णकी कृपासे ही विजय होती है’ यह कहकर अर्जुनका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.21.16 
कथं कृष्ण जयेमेति यैरुक्तं तत्र तैर्जितम्।
तत् प्रसादाद्धि त्रैलोक्यं प्राप्तं शक्रादिभि: सुरै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस समय जिन लोगों ने उनकी शरण ली और पूछा कि "कृष्ण! हम कैसे जीतेंगे?", वे स्वयं जीत गए। इस प्रकार श्रीकृष्ण की कृपा से ही इन्द्र आदि देवताओं ने तीनों लोकों का राज्य प्राप्त किया॥16॥
 
‘At that time, those who took shelter of him and asked, “Krishna! How will we win?”, they themselves won. In this way, it is only by the grace of Shri Krishna that Indra and other gods attained the kingdom of the three worlds.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)