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mahabharat 6.21.10: ‘विजय की इच्छा रखने वाले वीर योद्धा अपने बल और पराक्रम से वैसी विजय प्राप्त नहीं कर सकते जैसी वे सत्य, दान, धर्म और उत्साह से प्राप्त करते हैं।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 6.21: कौरवसेनाको देखकर युधिष्ठिरका विषाद करना और ‘श्रीकृष्णकी कृपासे ही विजय होती है’ यह कहकर अर्जुनका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 21: कौरवसेनाको देखकर युधिष्ठिरका विषाद करना और ‘श्रीकृष्णकी कृपासे ही विजय होती है’ यह कहकर अर्जुनका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.21.10 
न तथा बलवीर्याभ्यां जयन्ति विजिगीषव:।
यथा सत्यानृशंस्याभ्यां धर्मेणैवोद्यमेन च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘विजय की इच्छा रखने वाले वीर योद्धा अपने बल और पराक्रम से वैसी विजय प्राप्त नहीं कर सकते जैसी वे सत्य, दान, धर्म और उत्साह से प्राप्त करते हैं।॥10॥
 
‘The valiant warriors who desire victory cannot achieve the same kind of victory by their strength and valour as they achieve by truth, nobility, righteousness and enthusiasm.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)