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mahabharat 6.2.33: आकाश में बिना बादलों के भी अत्यन्त भयंकर गर्जना सुनाई दे रही है। रोते हुए वाहनों की आँखों से आँसू गिर रहे हैं।॥33॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.2.33 
अनभ्रे च महाघोर: स्तनित: श्रूयते स्वन:।
वाहनानां च रुदतां निपतन्त्यश्रुबिन्दव:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
आकाश में बिना बादलों के भी अत्यन्त भयंकर गर्जना सुनाई दे रही है। रोते हुए वाहनों की आँखों से आँसू गिर रहे हैं।॥33॥
 
‘A very terrifying roar can be heard in the sky even without any clouds. Tears are falling from the eyes of the crying vehicles.’॥ 33॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि श्रीवेदव्यासदर्शने द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वमें श्रीवेदव्यासदर्शनविषयक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)