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mahabharat 6.2.31: महाराज! जो अरुन्धती तीनों लोकों में भक्तों के मुकुटमणि के रूप में विख्यात हैं, वे वशिष्ठजी को छोड़कर चली गई हैं॥31॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.2.31 
या चैषा विश्रुता राजंस्त्रैलोक्ये साधुसम्मता।
अरुन्धती तयाप्येष वसिष्ठ: पृष्ठत: कृत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो अरुन्धती तीनों लोकों में भक्तों के मुकुटमणि के रूप में विख्यात हैं, वे वशिष्ठजी को छोड़कर चली गई हैं॥31॥
 
King! Arundhati, who is famous in all the three worlds as the jewel in the crown of devotees, has left Vashishtha behind her. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)