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mahabharat 6.2.26: देवताओं की मूर्तियाँ काँपती हैं, हँसती हैं, मुँह से रक्त उगलती हैं, व्याकुल होकर गिर पड़ती हैं॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.2.26 
देवताप्रतिमाश्चैव कम्पन्ति च हसन्ति च।
वमन्ति रुधिरं चास्यै: खिद्यन्ति प्रपतन्ति च॥ २६॥
 
 
अनुवाद
देवताओं की मूर्तियाँ काँपती हैं, हँसती हैं, मुँह से रक्त उगलती हैं, व्याकुल होकर गिर पड़ती हैं॥ 26॥
 
‘The idols of the gods tremble, laugh, spit blood from their mouths, become distressed and fall down.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)