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mahabharat 6.2.25: ‘सूअर और बिल्ली आकाश में उछलते-कूदते हैं, रात में लड़ते हैं और भयंकर गर्जना करते हैं। मैं यह सब प्रतिदिन देखता हूँ॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.2.25 
अन्तरिक्षे वराहस्य वृषदंशस्य चोभयो:।
प्रणादं युद्धॺतो रात्रौ रौद्रं नित्यं प्रलक्षये॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘सूअर और बिल्ली आकाश में उछलते-कूदते हैं, रात में लड़ते हैं और भयंकर गर्जना करते हैं। मैं यह सब प्रतिदिन देखता हूँ॥ 25॥
 
‘Boar and cat jump up and down in the sky and fight at night and roar terribly. I see this every day.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)