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mahabharat 6.2.21: संध्या के समय सूर्यदेव चारों ओर से तीन रंगों के घेरों से घिरे हुए थे। दोनों किनारों पर सफेद और लाल घेरे थे और बीच में एक काला घेरा दिखाई दे रहा था। इन घेरों के साथ बिजली भी चमक रही थी।   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.2.21 
श्वेतलोहितपर्यन्ता: कृष्णग्रीवा: सविद्युत:।
विवर्णा: परिघा: संधौ भानुमन्तमवारयन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
संध्या के समय सूर्यदेव चारों ओर से तीन रंगों के घेरों से घिरे हुए थे। दोनों किनारों पर सफेद और लाल घेरे थे और बीच में एक काला घेरा दिखाई दे रहा था। इन घेरों के साथ बिजली भी चमक रही थी।
 
‘At dusk, the Sun God was surrounded by three-coloured circles from all sides. There were white and red circles on both the edges and a black circle was visible in the middle. Lightning was also flashing along with these circles.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)