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mahabharat 6.2.17: ‘बाज, गिद्ध, कौवे, सारस और बगुले आकर वृक्षों की चोटियों पर समूह बनाकर बैठते हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.2.17 
श्येना गृध्राश्च काकाश्च कङ्काश्च सहिता बकै:।
सम्पतन्ति नगाग्रेषु समवायांश्च कुर्वते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘बाज, गिद्ध, कौवे, सारस और बगुले आकर वृक्षों की चोटियों पर समूह बनाकर बैठते हैं ॥17॥
 
‘Hawks, vultures, crows, cranes and herons come and sit on the top of trees and form groups.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)