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mahabharat 6.2.12: कोई भी शस्त्र उसे काट नहीं सकता। उस पर न तो परिश्रम का प्रभाव पड़ेगा और न ही थकान का। यह गवलगणपुत्र संजय इस युद्ध में जीवित बचेगा।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 2: वेदव्यासजीके द्वारा संजयको दिव्य दृष्टिका दान तथा भयसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.2.12 
नैनं शस्त्राणि छेत्स्यन्ति नैनं बाधिष्यते श्रम:।
गावल्गणिरयं जीवन् युद्धादस्माद् विमोक्ष्यते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कोई भी शस्त्र उसे काट नहीं सकता। उस पर न तो परिश्रम का प्रभाव पड़ेगा और न ही थकान का। यह गवलगणपुत्र संजय इस युद्ध में जीवित बचेगा।॥12॥
 
‘No weapon can cut him. He will not be affected by exertion or fatigue. This Sanjaya, son of Gavalgana, will survive this war.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)