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mahabharat 6.15.17: पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और उत्तर दिशा के जो वीर पुरुष अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण हैं, वे पितामह (भीष्म) की रक्षा करें॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 6.15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.15.17 
तथा प्राच्या: प्रतीच्याश्च दाक्षिणात्योत्तरापथा:।
सर्वथास्त्रेषु कुशलास्ते रक्षन्तु पितामहम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और उत्तर दिशा के जो वीर पुरुष अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण हैं, वे पितामह (भीष्म) की रक्षा करें॥ 17॥
 
The brave men from the east, west, south and north who are proficient in the art of weapons should protect the grandfather (Bhishma).॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)