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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश
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श्लोक 12
श्लोक
6.15.12
दु:शासन रथास्तूर्णं युज्यन्तां भीष्मरक्षिण:।
अनीकानि च सर्वाणि शीघ्रं त्वमनुचोदय॥ १२॥
अनुवाद
दुःशासन! तुम शीघ्र ही भीष्मजी की रक्षा के लिए रथों को तैयार करो। साथ ही समस्त सेनाओं को भी शीघ्र ही उनकी रक्षा के लिए तैयार होने का आदेश दो॥12॥
‘Dushasana! You quickly get the chariots ready to protect Bhishmaji. Also order all the armies to get ready to protect him quickly.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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