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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.15.1 
संजय उवाच
त्वद्युक्तोऽयमनुप्रश्नो महाराज यथार्हसि।
न तु दुर्योधने दोषमिममासंक्तुमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "महाराज, आपने जो प्रश्न बार-बार पूछे हैं, वे बिल्कुल सही हैं और आपके योग्य भी हैं; लेकिन आपको सारा दोष दुर्योधन पर नहीं डालना चाहिए।"
 
Sanjaya said, "Maharaj, the repeated questions that you have asked are absolutely correct and worthy of you; but you should not put the entire blame on Duryodhan."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)