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mahabharat 6.14.63-64h: संजय! जब मैं मन से सोचता और देखता हूँ, तो ऐसा नहीं लगता कि इस युद्ध में हमारे या शत्रु राजाओं के पास कोई प्राण बचेगा।   |   mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.14.63-64h 
नाहं स्वेषां परेषां वा बुद्धॺा संजय चिन्तयन्॥ ६३॥
शेषं किंचित् प्रपश्यामि प्रत्यनीके महीक्षिताम्।
 
 
अनुवाद
संजय! जब मैं मन से सोचता और देखता हूँ, तो ऐसा नहीं लगता कि इस युद्ध में हमारे या शत्रु राजाओं के पास कोई प्राण बचेगा।
 
Sanjay! When I think and observe with my mind, it does not seem that either our or the enemy kings will have any life left in this war. 63 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)