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mahabharat 6.14.28: शत्रुओं के सारथि कुन्तीपुत्रों, पांचालों तथा सृंजयों को मारकर पराक्रमी भीष्म ने उन पर उसी प्रकार बाणों की वर्षा की, जैसे वज्रधारी इन्द्र राक्षसों पर बाणों की वर्षा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.14.28 
योऽभ्यवर्षत कौन्तेयान् सपाञ्चालान् ससृंजयान्।
निघ्नन् पररथान् वीरो दानवानिव वज्रभृत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के सारथि कुन्तीपुत्रों, पांचालों तथा सृंजयों को मारकर पराक्रमी भीष्म ने उन पर उसी प्रकार बाणों की वर्षा की, जैसे वज्रधारी इन्द्र राक्षसों पर बाणों की वर्षा करते हैं।
 
Killing the enemy's charioteers - the sons of Kunti, the Panchalas and the Srinjayas - the valiant Bhishma showered arrows upon them in the same manner as the thunderbolt-bearing Indra showers arrows upon demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)