Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.14.10-11: जो निरंतर शत्रुओं की सेनाओं का संहार करते रहते थे, जिनके बाणों में दाढ़ी थी, जिनके धनुष का मुख खुला हुआ था, जिनकी तलवार ही उनकी जीभ थी, उन महाबली और प्रचण्ड पुरुष भीष्म को कुन्तीनन्दन अर्जुन ने युद्ध में कैसे मार डाला? मनस्वी भीष्म इस प्रकार पराजय के योग्य नहीं थे। वे लज्जाशील और पराजय से रहित थे। | mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो निरंतर शत्रुओं की सेनाओं का संहार करते रहते थे, जिनके बाणों में दाढ़ी थी, जिनके धनुष का मुख खुला हुआ था, जिनकी तलवार ही उनकी जीभ थी, उन महाबली और प्रचण्ड पुरुष भीष्म को कुन्तीनन्दन अर्जुन ने युद्ध में कैसे मार डाला? मनस्वी भीष्म इस प्रकार पराजय के योग्य नहीं थे। वे लज्जाशील और पराजय से रहित थे।
How did Kuntinandan Arjun kill that fierce and fierce man Bhishma, who used to continuously destroy the enemy's armies, whose arrows had beards, whose bow had an open mouth, whose sword was his tongue, in the battle? Manasvi Bhishma was not worthy of defeat in this manner. He was shy and devoid of defeat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥