Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.122.d1-24: परन्तु माता कुन्ती ने मुझे जल में फेंक दिया और सारथी ने मुझे उठा लिया। मैं प्राचीन काल से ही दुर्योधन से प्रेम करती रही हूँ और उसके साथ सुखपूर्वक रहती आई हूँ। मैंने दुर्योधन को वचन दिया है कि उसे जो भी कठिन कार्य करना होगा, मैं उसे पूरा करूँगी। मैं दुर्योधन के धन का भोग करके उसे व्यर्थ नहीं कर सकती।॥24॥ | mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परन्तु माता कुन्ती ने मुझे जल में फेंक दिया और सारथी ने मुझे उठा लिया। मैं प्राचीन काल से ही दुर्योधन से प्रेम करती रही हूँ और उसके साथ सुखपूर्वक रहती आई हूँ। मैंने दुर्योधन को वचन दिया है कि उसे जो भी कठिन कार्य करना होगा, मैं उसे पूरा करूँगी। मैं दुर्योधन के धन का भोग करके उसे व्यर्थ नहीं कर सकती।॥24॥
But mother Kunti threw me into the water and the charioteer raised me. Since ancient times I have been loving Duryodhan and have been living happily with him. I have pledged to Duryodhan that whatever difficult task he has to complete, I will complete it. I cannot make Duryodhan futile by enjoying his wealth.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥