श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.122.39 
संजय उवाच
इत्युक्तवति गाङ्गेये अभिवाद्योपमन्त्र्य च।
राधेयो रथमारुह्य प्रायात् तव सुतं प्रति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! गंगापुत्र भीष्म की यह बात सुनकर राधापुत्र कर्ण ने उन्हें प्रणाम किया, उनकी अनुमति ली और रथ पर सवार होकर आपके पुत्र दुर्योधन के पास गया।
 
Sanjaya says - O King! Upon hearing Ganga's son Bhishma say this, Radha's son Karna bowed to him, took his permission and mounted his chariot and went to your son Duryodhana.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मकर्णसंवादे द्वाविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्म-कर्णसंवादविषयक एक सौ बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२२॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४० १/२ श्लोक हैं।] ॥ भीष्मपर्व सम्पूर्णम्॥ अनुष्टुप् छन्द (अन्य बड़े छन्द) बड़े छन्दोंको ३२ अक्षरोंके कुल योग अनुष्टुप् मानकर गिननेपर उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक—५६१०॥ –(२९९॥ )–४११॥।— ६०२२।— दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक—७१॥ –(४॥ ) ६–७७॥ भीष्मपर्वकी सम्पूर्ण श्लोक-संख्या – ६१००
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)