श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.12.2 
घृततोय: समुद्रोऽत्र दधिमण्डोदकोऽपर:।
सुरोद: सागरश्चैव तथान्यो जलसागर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
क्षीरोद समुद्र के बाद घृतोद समुद्र है। फिर दधिमण्डोधक समुद्र है। इसके बाद सुरोद समुद्र है, फिर मीठे पानी का समुद्र है॥2॥
 
After the Kshirod sea, there is the Ghritod sea. Then there is the Dadhimandodhaka sea. After this, there is the Surod sea, then there is the sea of ​​sweet water.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)