Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.95: महात्मा गंगानन्दन भीष्म समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, पुरुषों में सिंह के समान पराक्रमी और काल को भी वश में रखने वाले थे। उन्होंने दक्षिण दिशा में मृत्यु को क्यों स्वीकार किया?॥ 95॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं महात्मा गाङ्गेय: सर्वशस्त्रभृतां वर:।
कालकर्ता नरव्याघ्र: सम्प्राप्ते दक्षिणायने॥ ९५॥
अनुवाद
महात्मा गंगानन्दन भीष्म समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, पुरुषों में सिंह के समान पराक्रमी और काल को भी वश में रखने वाले थे। उन्होंने दक्षिण दिशा में मृत्यु को क्यों स्वीकार किया?॥ 95॥
Mahatma Ganganandan Bhishma was the best among all the weapon holders, as valiant as a lion among men and had mastery over even time. Why did he accept death in the south?॥ 95॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥