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mahabharat 6.119.94: भरत! समय का ध्यान रखते हुए वीर भीष्म ने अपनी इंद्रियों को स्थिर रखा। उस समय आकाश में चारों ओर से दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  6.119.94 
संज्ञां चोपालभद् वीर: कालं संचिन्त्य भारत।
अन्तरिक्षे च शुश्राव दिव्या वाच: समन्तत:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
भरत! समय का ध्यान रखते हुए वीर भीष्म ने अपनी इंद्रियों को स्थिर रखा। उस समय आकाश में चारों ओर से दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देने लगीं।
 
Bharata! Considering the time, the brave Bhishma kept his senses intact. At that time divine voices were heard from all sides in the sky. 94.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)