श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.119.92 
शरतल्पे महेष्वासं शयानं पुरुषर्षभम्।
रथात् प्रपतितं चैनं दिव्यो भाव: समाविशत्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
रथसे गिरकर बाणोंकी शय्यापर लेटे हुए महाधनुर्धर भीष्म दिव्य भावसे परिपूर्ण हो गए ॥92॥
 
Having fallen from the chariot, the great archer Bhishma, lying on a bed of arrows, was filled with divine emotion. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)