श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  6.119.66-67h 
सर्वे ह्यपि न मे दु:खं कुर्युरन्ये नराधिपा:॥ ६६॥
वीरं गाण्डीवधन्वानमृते जिष्णुं कपिध्वजम्।
 
 
अनुवाद
गाण्डीवधारी वीर वानरवीर अर्जुन के अतिरिक्त अन्य कोई भी राजा अपने प्रहारों से मुझे इतनी पीड़ा नहीं पहुँचा सकता।' 66 1/2
 
No other king, except the valiant monkey-flaunting Arjuna, who wields the Gandiva, can cause me so much pain by their attacks.' 66 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)