Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.64: उनका स्पर्श गदा और भाले के समान जान पड़ता है, वे क्रोध में भरे हुए विषैले सर्पों के समान डसते हैं। ये शिखण्डी के बाण नहीं हैं॥64॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनका स्पर्श गदा और भाले के समान जान पड़ता है, वे क्रोध में भरे हुए विषैले सर्पों के समान डसते हैं। ये शिखण्डी के बाण नहीं हैं॥64॥
‘Their touch feels like the blow of a mace and a spear, they bite like venomous serpents filled with anger. These are not the arrows of Shikhandi.॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥