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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
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श्लोक 63
श्लोक
6.119.63
मम प्राणानारुजन्ति नेमे बाणा: शिखण्डिन:।
नाशयन्तीव मे प्राणान् यमदूता इवाहिता:॥ ६३॥
अनुवाद
ये मेरी आत्मा को पीड़ा पहुँचा रहे हैं। मृत्यु के हानिकारक दूतों की तरह, ये मेरी आत्मा का नाश कर रहे हैं। ये शिखंडी के बाण कदापि नहीं हो सकते।
‘These are causing pain to my soul. Like the harmful messengers of death, they are destroying my soul. These can never be the arrows of Shikhandi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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