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mahabharat 6.119.51-52h: तत्पश्चात् उसने नौ बाणों से उसे घायल कर दिया और एक बाण से उसकी ध्वजा काट डाली। फिर दस बाणों से उसके सारथि को झकझोर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  6.119.51-52h 
अथैनं नवभिर्विद्‍ध्वा ध्वजमेकेन चिच्छिदे॥ ५१॥
सारथिं विशिखैश्चास्य दशभि: समकम्पयत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने नौ बाणों से उसे घायल कर दिया और एक बाण से उसकी ध्वजा काट डाली। फिर दस बाणों से उसके सारथि को झकझोर दिया।
 
Thereafter he wounded him with nine arrows and cut off his flag with one arrow. Then he shook his charioteer with ten arrows. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)