श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  6.119.44-45h 
स तेनाभिहत: संख्ये भीष्म: कुरुपितामह:॥ ४४॥
नाकम्पत महाराज क्षितिकम्पे यथाचल:।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! युद्ध में शिखण्डी द्वारा आहत होने पर भी कुरुवंश के पितामह भीष्म उसी प्रकार नहीं काँपे, जैसे भूकम्प आने पर भी पर्वत नहीं काँपता॥44 1/2॥
 
Nareshwar! Even after being hurt by Shikhandi in the war, Bhishma, the grandfather of Kuru dynasty, did not tremble in the same way as a mountain does not shake even after an earthquake. 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)