Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.42-43h: देवताओं के ये वचन सुनकर महातपस्वी शान्तनुपुत्र भीष्म समस्त आवरणों को छेदने वाले तीखे बाणों से बिंधे हुए भी अर्जुन को परास्त करने का कोई प्रयत्न न कर सके ॥42 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवताओं के ये वचन सुनकर महातपस्वी शान्तनुपुत्र भीष्म समस्त आवरणों को छेदने वाले तीखे बाणों से बिंधे हुए भी अर्जुन को परास्त करने का कोई प्रयत्न न कर सके ॥42 1/2॥
Upon hearing these words of the gods, the great ascetic Shantanu's son Bhishma could not make any attempt to defeat Arjun even after being pierced by sharp arrows that pierced all the coverings. ॥ 42 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥