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mahabharat 6.119.41: प्रजानाथ! यह जानकर कि सम्पूर्ण लोकों के प्रिय भीष्म रथ से गिरना चाहते हैं, उस समय सम्पूर्ण देवता भी अत्यन्त आश्चर्यचकित हुए॥41॥   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.119.41 
सम्भ्रमश्च महानासीत् त्रिदशानां विशाम्पते।
पतिष्यति रथाद् भीष्मे सर्वलोकप्रिये तदा॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! यह जानकर कि सम्पूर्ण लोकों के प्रिय भीष्म रथ से गिरना चाहते हैं, उस समय सम्पूर्ण देवता भी अत्यन्त आश्चर्यचकित हुए॥41॥
 
Prajanath! Knowing that Bhishma, the beloved of all the worlds, wants to fall from the chariot, all the gods were also very surprised at that time. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)