श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.119.38 
अस्य वाक्यस्य निधने प्रादुरासीच्छिवोऽनिल:।
अनुलोम: सुगन्धी च पृषतैश्च समन्वित:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उनके इतना कहते ही जल की बूंदों के साथ सुखद, शीतल, सुगन्धित और मन को प्रसन्न करने वाली वायु बहने लगी ॥38॥
 
As soon as he finished saying this, a pleasant, cool, fragrant and mind-pleasing breeze started blowing along with drops of water. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)