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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
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श्लोक 37
श्लोक
6.119.37
यत् ते व्यवसितं तात तदस्माकमपि प्रियम्।
तत् कुरुष्व महाराज युद्धे बुद्धिं निवर्तय॥ ३७॥
अनुवाद
‘पिताजी! आपने जो निश्चय किया है, वह हमें भी बहुत प्रिय है। महाराज! अब आप भी वैसा ही करें। युद्ध से अपना मन हटा लें।’ ॥37॥
‘Father! Whatever you have decided is very dear to us too. Maharaj! Now you do the same. Remove your mind from the war.' ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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