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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
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श्लोक 36
श्लोक
6.119.36
एवं ज्ञात्वा व्यवसितं भीष्मस्यामिततेजस:।
ऋषयो वसवश्चैव वियत्स्था भीष्ममब्रुवन्॥ ३६॥
अनुवाद
परम तेजस्वी भीष्म का यह निश्चय जानकर आकाश में स्थित ऋषिगण और वसुगण उनसे इस प्रकार बोले-॥36॥
Knowing this resolve of the immensely illustrious Bhishma, the sages and the Vasus standing in the sky spoke to him as follows -॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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