Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.31-32h: अपनी शक्ति को छिन्न-भिन्न होते देख भीष्म जी क्रोध से भर गए और शत्रुनगर को जीतने वाले उन वीर योद्धा ने युद्धस्थल में अपनी बुद्धि से इस प्रकार सोचा -॥31 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपनी शक्ति को छिन्न-भिन्न होते देख भीष्म जी क्रोध से भर गए और शत्रुनगर को जीतने वाले उन वीर योद्धा ने युद्धस्थल में अपनी बुद्धि से इस प्रकार सोचा -॥31 1/2॥
Seeing his power shattered, Bhishma ji became filled with anger and that brave warrior, the conqueror of Shatrunagar, thought thus through his intellect on the battle-field -॥ 31 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥