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mahabharat 6.119.30-31h: क्रोधित अर्जुन द्वारा काटी गई वह शक्ति मेघ से छूटकर बिजली के समान पृथ्वी पर गिर पड़ी।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  6.119.30-31h 
सा पपात तथा च्छिन्ना संक्रुद्धेन किरीटिना॥ ३०॥
मेघवृन्दपरिभ्रष्टा विच्छिन्नेव शतह्रदा।
 
 
अनुवाद
क्रोधित अर्जुन द्वारा काटी गई वह शक्ति मेघ से छूटकर बिजली के समान पृथ्वी पर गिर पड़ी।
 
That Shakti, cut by the angry Arjuna, was released from a cloud and fell on the earth like a falling lightning. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)