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mahabharat 6.119.109-110h: हंसों से ऐसा कहकर वे पहले की भाँति अपनी बाणों की शय्या पर लेट गये। कुरुवंश के गौरव, पराक्रमी और पराक्रमी भीष्म के गिर जाने पर पाण्डव और संजय हर्ष से गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 109-110h
 
 
श्लोक  6.119.109-110h 
इत्युक्त्वा तांस्तदा हंसान् स शेते शरतल्पग:।
एवं कुरूणां पतिते शृङ्गे भीष्मे महौजसि॥ १०९॥
पाण्डवा: सृंजयाश्चैव सिंहनादं प्रचक्रिरे।
 
 
अनुवाद
हंसों से ऐसा कहकर वे पहले की भाँति अपनी बाणों की शय्या पर लेट गये। कुरुवंश के गौरव, पराक्रमी और पराक्रमी भीष्म के गिर जाने पर पाण्डव और संजय हर्ष से गर्जना करने लगे।
 
Having said this to the swans, he lay down on his bed of arrows as before. After the fall of Bhishma, the pride of the Kuru clan, the mighty and mighty, the Pandavas and Sanjaya began to roar with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)