श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  6.118.51-52h 
जघान द्रुपदानीके रथान् सप्त महारथ:।
तत: किलकिलाशब्द: क्षणेन समभूत् तदा॥ ५१॥
मत्स्यपाञ्चालचेदीनां तमेकमभिधावताम्।
 
 
अनुवाद
महारथी भीष्म ने द्रुपद की सेना के सात महारथियों को मार डाला। फिर क्षण भर में ही मत्स्य, पांचाल और चेदिदेश के योद्धाओं का महान् कोलाहल वहाँ गूंज उठा, जो अकेले भीष्म पर आक्रमण कर रहे थे। 51 1/2॥
 
The great warrior Bhishma killed seven charioteers of Drupada's army. Then in a moment the great noise of the warriors of Matsya, Panchal and Chedidesh, who attacked the sole Bhishma, echoed there. 51 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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