श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  6.118.5-6 
क्षये तस्मिन् महारौद्रे निर्विशेषमजायत।
तत: शल्य: कृपश्चैव चित्रसेनश्च भारत॥ ५॥
दु:शासनो विकर्णश्च रथानास्थाय भास्वरान्।
पाण्डवानां रणे शूरा ध्वजिनीं समकम्पयन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस भयंकर युद्धमें किसीकी भी कोई विशेष पहचान शेष नहीं रह गई थी। तत्पश्चात् शल्य, कृपाचार्य, चित्रसेन, दुःशासन और विकर्ण- ये कौरव योद्धा चमकते हुए रथोंपर बैठकर पाण्डवोंपर आक्रमण करके उनकी सेनाको रणभूमिमें थर्राने लगे।
 
No one had any special identity left in that terrible war. India Thereafter, Shalya, Kripacharya, Chitrasena, Dushasana and Vikarna – these Kaurava warriors, sitting on shining chariots, attacked the Pandavas and started shaking their army in the battlefield. 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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