श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  6.118.49-50 
चक्रे शरविघातं च क्रीडन्निव पितामह:॥ ४९॥
नाभिसंधत्त पाञ्चाल्ये स्मयमानो मुहुर्मुहु:।
स्त्रीत्वं तस्यानुसंस्कृत्य भीष्मो बाणान् शिखण्डिने॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पितामह भीष्म खेल-खेल में ही अपने बाणों से पाण्डव सैनिकों के अस्त्र-शस्त्र नष्ट करने लगे। किन्तु शिखण्डी के नारीत्व का स्मरण करके वे बार-बार मुस्कुराते थे; उन्होंने उस पर बाण नहीं चलाये। 49-50॥
 
There grandfather Bhishma playfully started destroying the weapons of Pandavas soldiers with his arrows. But remembering Shikhandi's womanhood, he used to smile again and again; They did not shoot arrows at him. 49-50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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