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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार
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श्लोक 37
श्लोक
6.118.37
ततस्तस्मिन् क्षणे राजंश्चोदितो वानरध्वज:।
सध्वजं सरथं साश्वं भीष्ममन्तर्दधे शरै:॥ ३७॥
अनुवाद
राजन! इस प्रकार भगवान् की प्रेरणा से प्रेरित होकर कपिध्वज अर्जुन ने उसी समय अपने बाणों से ध्वजा, रथ और घोड़ों सहित भीष्म को ढक लिया॥37॥
Rajan! Thus inspired by God, Kapidhwaja Arjuna at that very moment covered Bhishma along with the flag, chariot and horses with his arrows. 37॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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