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mahabharat 6.117.53: हे राजन! कुण्डलधारी महारथी राजकुमारों और गिरकर दूर फेंके जा रहे अंगद के शवों से सारा रणक्षेत्र आच्छादित हो रहा था॥53॥   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.117.53 
छन्नमायोधनं राजन् कुण्डलाङ्गदधारिभि:।
पतितै: पात्यमानैश्च राजपुत्रैर्महारथै:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कुण्डलधारी महारथी राजकुमारों और गिरकर दूर फेंके जा रहे अंगद के शवों से सारा रणक्षेत्र आच्छादित हो रहा था॥53॥
 
O King! The entire battle-field was being covered with the dead bodies of the mighty warrior princes, who were wearing earrings and Angad, who had fallen and were being thrown away. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)