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mahabharat 6.117.48-49h: महाराज! इसी प्रकार वह सूर्य के समान अन्य राजाओं को भी बाणों की वर्षा से पीड़ित करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  6.117.48-49h 
तथैव शरवर्षेण भास्करो रश्मिवानिव॥ ४८॥
अन्यानपि महाराज तापयामास पार्थिवान्।
 
 
अनुवाद
महाराज! इसी प्रकार वह सूर्य के समान अन्य राजाओं को भी बाणों की वर्षा से पीड़ित करने लगा।
 
Maharaj! In the same way, he started tormenting other kings also who were like the Sun with the shower of his arrows. 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)