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mahabharat 6.117.47-48h: हे भरतश्रेष्ठ! दसवें दिन प्रातःकाल उन महारथियों को परास्त करके कुन्तीपुत्र अर्जुन युद्धभूमि में धूमरहित अग्नि के समान चमकने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  6.117.47-48h 
पूर्वाह्णे भरतश्रेष्ठ पराजित्य महारथान्॥ ४७॥
प्रजज्वाल रणे पार्थो विधूम इव पावक:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! दसवें दिन प्रातःकाल उन महारथियों को परास्त करके कुन्तीपुत्र अर्जुन युद्धभूमि में धूमरहित अग्नि के समान चमकने लगे।
 
O best of the Bharatas! Having defeated those mighty warriors in the morning of the tenth day, Arjuna, the son of Kunti, began to shine on the battlefield like a smokeless fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)