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mahabharat 6.117.37-38h: जब अर्जुन ने शक्तिशाली धनुष धारण करके हजारों बाण चलाने आरम्भ किये, तब उनका गाण्डीव धनुष आकाश में चमकता हुआ दिखाई दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  6.117.37-38h 
तस्य बाणसहस्राणि सृजतो दृढधन्विन:॥ ३७॥
दीप्यमानमिवाकाशे गाण्डीवं समदृश्यत।
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन ने शक्तिशाली धनुष धारण करके हजारों बाण चलाने आरम्भ किये, तब उनका गाण्डीव धनुष आकाश में चमकता हुआ दिखाई दिया।
 
When Arjuna, wielding a strong bow, began creating thousands of arrows, his Gandiva bow appeared blazing in the sky. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)